भाजपा सत्ता में बनी रही, बहुमत के बिना
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रही, हालाँकि अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गई।
भाजपा ने कुल 199 सीटों में से 95 सीटें जीतीं।
इससे वह अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 100 सीटों के आँकड़े से पीछे रही — (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 76 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव में राजस्थान के किसी भी पिछले विधान सभा चुनाव से ज़्यादा पंजीकृत मतदाता वोट डालने आए।
लगभग 59.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
भाजपा अब राज्य में लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
सबसे बड़ा अकेला बदलाव यह रहा कि 27 सीटें भाजपा से कांग्रेस के पास गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सीटों के फ़ासले के बावजूद (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में भाजपा और कांग्रेस लगभग बराबर रहीं — 38.6% के मुक़ाबले 38.3%।
पूरे राज्य में सबसे करीबी मुक़ाबला हिंडोली, राजस्थान में रहा, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 15 वोट था।
निम्बाहेड़ा, राजस्थान में लगभग 78.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार सीकर, राजस्थान में उतरे, बैलट पर 32 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इससे अपने दम पर सीटों का बहुमत न होते हुए भी वही पार्टी राज्य की सत्ता में बनी रही।