कांग्रेस की जीत का सिलसिला जारी
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती और सत्ता पर अपनी पकड़ आगे बढ़ाई; किसी भी प्रतिद्वंद्वी से कोई असली चुनौती नहीं मिली।
कांग्रेस ने कुल 184 सीटों में से 145 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 52 सीटें ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय 11 सीटों के साथ उसके बाद रही।
क्या बदला
इससे राज्य में सत्ताधारी पार्टी की लगातार जीतों का सिलसिला एक नई ऊँचाई पर पहुँचा, और सरकार नहीं बदली।
कांग्रेस अब राज्य में लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी — ऐसा सिलसिला जिसकी बराबरी कोई और पार्टी नहीं कर पाई है।
राज्य के पंजीकृत मतदाताओं में से पहले से कहीं ज़्यादा लोगों ने वोट डाला: इस बार (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 55.9% तक पहुँचा, जो राज्य के इतिहास में तब तक का सबसे ऊँचा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: शिव, राजस्थान का फ़ैसला सिर्फ़ 9 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, उनियारा, राजस्थान में जीत का अंतर 77.0% वोट रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत जायल, राजस्थान में रहा, जहाँ 83.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
1 सीट का फ़ैसला निर्विरोध जीत से हुआ — यानी ऐसी सीट जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम से राज्य विधान सभा पर उसी पार्टी की लगातार पकड़ बनी रही; सरकार नहीं बदली।