दौसाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
मूल चन्द समरिया (SWA) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 50.2% वोट पाकर दौसा सीट जीती और राम लाल बंशीवाल (INC) को 119 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में सीट नंबर 46 नदबई थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 46 दूदू है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
दौसा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 119 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
2 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मूल चन्द समरिया महागठबंधन | महागठबंधन | 14,17750.2% |
| 2 | राम लाल बंशीवाल कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 14,05849.8% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SWA और INC को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.00 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दौसा से कौन जीता, 1967–1972
SWA ने 1967 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत लगभग पहले जितना ही रहा: 50.2%। मतदान प्रतिशत 1967 के 49.4% से घटकर 36.5% रह गया।
- 1967डूंगाराम (SWA), जीत का अंतर 25.0%
- 1972मूल चन्द समरिया (SWA), जीत का अंतर 0.4%