राजस्थान में भाजपा की भारी जीत
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में भारी जीत हासिल की और इंडियन नेशनल कांग्रेस से सत्ता ले ली।
उसने 200 सीटों में से 163 सीटें जीतीं, जो बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 62 ज़्यादा थीं।
इसके बाद कांग्रेस 21 सीटों के साथ रही।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बढ़कर 75.6% हो गया, जो राज्य के इतिहास में दर्ज सबसे ऊँचा था।
क्या बदला
उस साल सबसे साफ़ बदलाव राज्य के दो सबसे बड़े दलों के बीच हुआ।
83 सीटें कांग्रेस से भाजपा के पास गईं — किसी भी और दो दलों के बीच से ज़्यादा; कुल 129 सीटों पर पार्टी बदली।
इससे भाजपा की अपनी सीटें 78 से बढ़कर 163 हो गईं।
अहम आँकड़े
सबसे क़रीबी मुक़ाबला आमेर, राजस्थान में हुआ, जिसका फ़ैसला 329 वोटों से हुआ।
सबसे एकतरफ़ा परिणाम अलवर शहर, राजस्थान में आया, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 44.3% वोट रहा।
किसी भी सीट पर सबसे कम मतदान प्रतिशत सुमेरपुर, राजस्थान में दर्ज हुआ, 61.2%।
सभी वोटों में से 1.9% (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को गए।
पृष्ठभूमि
वसुंधरा राजे यह पद पहले भी संभाल चुकी थीं: वे 8 दिसंबर 2003 को राजस्थान की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं, दिसंबर 2008 तक इस पद पर रहीं, और इस चुनाव के बाद फिर मुख्यमंत्री बनीं।1