कांग्रेस से जुड़ी पार्टी की सत्ता में वापसी
क्या हुआ
सत्ता फिर बदली: जनता पार्टी के शासन के एक दौर के बाद कांग्रेस से जुड़ी एक पार्टी राज्य की अगुवाई करने लौटी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने कुल 200 सीटों में से 133 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी बहुमत के आँकड़े से 32 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी, भारतीय जनता पार्टी, के पास 32 सीटें रह गईं।
क्या बदला
अलग-अलग सीटों के स्तर पर इस चुनाव ने राज्य की विधान सभा को लगभग पूरी तरह बदल दिया।
पिछले चुनाव के मुक़ाबले लगभग हर सीट पर पार्टी बदली: 200 में से 199 सीटें पहले से अलग पार्टी के पास गईं।
इस बदलाव की सबसे बड़ी मार जनता पार्टी पर पड़ी, जिसकी 97 सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के पास चली गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला महवा, राजस्थान में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 16 वोट रहा।
उस साल सबसे बड़ा जीत का अंतर आसपुर, राजस्थान में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 52.6% वोट आगे रहा।
श्रीकरणपुर, राजस्थान में लगभग 71.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
जायल, राजस्थान पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से राज्य की सबसे बड़ी सीट थी, जिसकी मतदाता सूची में 4,76,419 नाम थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव से पहले कुछ समय राजस्थान में सरकार चलाने वाली पार्टी इस बार दूसरे स्थान पर खिसक गई।