सवाई माधोपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1980
हंसराज (BJP) ने 1980 के विधान सभा चुनाव में 33.0% वोट पाकर सवाई माधोपुर सीट जीती और फारूक हसन (INC(I)) को 975 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 83 टोडारायसिंह थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 83 करौली है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सवाई माधोपुर का फ़ैसला सिर्फ़ 1.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 975 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | हंसराज | 19,16933.0% | |
| 2 | फारूक हसन | 18,19431.3% | |
| 3 | मोती लाल JNP(SC) | JNP(SC) | 17,69830.5% |
| 4 | बाबू लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 8941.5% |
| 5 | अजीजुद्दीन | 8431.4% | |
| 6 | जितेन्द्र JNP(JP) | JNP(JP) | 4920.8% |
| 7 | बद्री लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 4490.8% |
| 8 | महेन्द्र कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 1730.3% |
| 9 | एस. शौकत अली निर्दलीय | निर्दलीय | 1450.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.33 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सवाई माधोपुर से कौन जीता, 1977–2003
BJP ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 49.5% से बढ़कर 63.1% हो गया। इसके बाद 1985 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।