कांग्रेस की मामूली अंतर से सत्ता में वापसी
क्या हुआ
विपक्ष सत्ता में लौटा, लेकिन उसे अपने दम पर बहुमत नहीं मिला।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 200 में से 100 सीटें जीतीं, जिससे (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
सत्ता से बाहर हुई भारतीय जनता पार्टी अपने पिछले बहुमत से गिरकर सिर्फ़ 73 सीटों पर आ गई।
क्या बदला
सीटों का बड़ा हिस्सा सत्ता से बाहर जा रही पार्टी से सत्ता में आ रही पार्टी के पास चला गया।
75 सीटें भाजपा से कांग्रेस के पास गईं — इस चुनाव का सबसे बड़ा अकेला बदलाव।
कुल मिलाकर, जिन 200 सीटों की तुलना की गई, उनमें से 117 पर जीतने वाली पार्टी बदल गई।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) भी बदला: सत्ता में आ रही पार्टी का +6.2 प्रतिशत अंक, सत्ता से बाहर हुई पार्टी का -6.4 प्रतिशत अंक।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
किशनपोल, राजस्थान में राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार थे: मतपत्र पर 46 नाम।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: आसीन्द, राजस्थान में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 154 वोट रहा।
पूरे राज्य में 1.3% मतदाताओं ने (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) चुना।
पोकरण, राजस्थान में किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दर्ज हुआ, 88.3%।
पृष्ठभूमि
इससे सत्ता में रही पार्टी का दौर ख़त्म हुआ, हालाँकि सत्ता में आ रही पार्टी भी बहुमत से पीछे रही।