कांग्रेस की वापसी, बहुमत के बिना
क्या हुआ
विपक्ष सत्ता में लौटा, लेकिन अपने दम पर बहुमत से पीछे रह गया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 200 सीटों में से 96 सीटें जीतीं।
सत्ता से बाहर हुई भारतीय जनता पार्टी 78 सीटों के साथ ज़्यादा पीछे नहीं रही।
जीतने वाली पार्टी के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) दूसरे स्थान वाली पार्टी के करीब था: 36.8% के मुक़ाबले 34.3%।
क्या बदला
राजस्थान की सीटों के (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के बाद यह पहला चुनाव था।
सत्ता में आ रही कांग्रेस की अपनी सीटें पिछले चुनाव की 56 से बढ़कर इस बार 96 हो गईं।
फिर भी वह 101 सीटों के आँकड़े से पीछे रही — (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
पूरे राज्य में सबसे करीबी मुक़ाबला: नाथद्वारा, राजस्थान में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 1 वोट था।
दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर बागीदोरा, राजस्थान में रहा, 37.3% वोट।
संगरिया, राजस्थान में किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दर्ज हुआ, 83.1%।
सूरसागर, राजस्थान में राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार थे: कुल 28।
पृष्ठभूमि
इससे सत्ता में रही पार्टी का दौर ख़त्म हुआ।