कांग्रेस को ज़बरदस्त बहुमत
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने यह चुनाव जीता और सीटों के साफ़ बहुमत के साथ राज्य विधान सभा पर नियंत्रण हासिल किया।
उसने कुल 200 सीटों में से 113 सीटें जीतीं।
इससे उसके पास अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी संख्या से 12 सीटें ज़्यादा थीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी ने 39 सीटें जीतीं।
क्या बदला
अलग-अलग सीटों के स्तर पर इस चुनाव ने राज्य की विधान सभा को लगभग पूरी तरह बदल दिया।
राज्य की 200 सीटों में से 187 सीटों पर पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
अकेले 74 सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) से इंडियन नेशनल कांग्रेस के पास गईं — साल का सबसे बड़ा अकेला बदलाव।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे करीबी मुक़ाबला कठूमर, राजस्थान में रहा, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 117 वोट था।
दूसरी ओर, डीग, राजस्थान 95.6% वोट के अंतर से जीती गई, जो साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर था।
महवा, राजस्थान में लगभग 74.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
डूंगरपुर, राजस्थान में सिर्फ़ 29.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम था।
पृष्ठभूमि
तब तक राज्य विधान सभा में सिर्फ़ दो सबसे बड़े दल ही सीटें नहीं जीत रहे थे।
इस चुनाव में 6 दलों ने कम से कम एक सीट जीती।