डीगविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
कृष्णेन्द्र कौर (दीपा) (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 97.1% वोट पाकर डीग सीट जीती और मुन्ना मारवारी किसेन (निर्दलीय) को 43,452 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 70 बाड़ी थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 70 कामां है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — कृष्णेन्द्र कौर (दीपा) 95.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | कृष्णेन्द्र कौर (दीपा) निर्दलीय | निर्दलीय | 44,13997.1% |
| 2 | मुन्ना मारवारी किसेन निर्दलीय | निर्दलीय | 6871.5% |
| 3 | नवल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3660.8% |
| 4 | मान सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1040.2% |
| 5 | ठाकुर बच्चन सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 930.2% |
| 6 | बच्चू सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 530.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 1.06 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
डीग से कौन जीता, 1977–2003
1980 की तरह इस बार भी यहाँ एक निर्दलीय उम्मीदवार जीता। मतदान प्रतिशत 1980 के 59.0% से घटकर 55.0% रह गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट JD ने जीती।