खेरवाड़ाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1985
दया राम परमार (निर्दलीय) ने 1985 के विधान सभा चुनाव में 45.7% वोट पाकर खेरवाड़ा सीट जीती और रूप लाल परमार (INC) को 235 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 146 जैतारण थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 146 सिरोही है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
खेरवाड़ा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 235 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | दया राम परमार निर्दलीय | निर्दलीय | 15,43345.7% |
| 2 | रूप लाल परमार | 15,19845.0% | |
| 3 | मांगी लाल मीना जनता | जनता | 1,5454.6% |
| 4 | किशोर सिंह वाम दल | वाम दल | 1,2273.6% |
| 5 | भेरा मीना निर्दलीय | निर्दलीय | 3851.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, INC और JNP को 95% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.41 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
खेरवाड़ा से कौन जीता, 1977–2003
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC(I) से छीन ली, जिसने इसे 1980 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1980 के 44.4% से घटकर 39.1% रह गया। इसके बाद 1990 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।