राजस्थान 1962 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 88 सीटें (50.0%)SWA: 36 सीटें (20.5%)IND: 22 सीटें (12.5%)BJS: 15 सीटें (8.5%)CPI: 5 सीटें (2.8%)SOC: 5 सीटें (2.8%)RRP: 3 सीटें (1.7%)PSP: 2 सीटें (1.1%)बहुमत के लिए 89176सरकार बनाने के लिए 89
  • INC8850.0%
  • SWA3620.5%
  • निर्दलीय2212.5%
  • BJS158.5%
  • CPI52.8%
  • SOC52.8%
  • RRP31.7%
  • PSP21.1%
चुनाव की कहानी

तीसरी जीत, लेकिन बहुमत नहीं

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर जीती, लेकिन उसकी स्थिति पहले से कमज़ोर हुई।

कांग्रेस ने कुल 176 सीटों में से 88 सीटें जीतीं।

यह पिछली बार जीती 119 सीटों से कम था।

उसकी सबसे करीबी चुनौती, स्वतंत्र पार्टी, पहली बार चुनाव लड़ रही थी और उसने 36 सीटें जीतीं।

क्या बदला

इस बार सबसे आगे रही पार्टी बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई, जिससे विधान सभा बनी।

कांग्रेस ने 88 सीटें जीतीं, जो बहुमत के लिए ज़रूरी 89 से कम थीं।

फिर भी इससे कांग्रेस की लगातार जीतों का सिलसिला 3 तक पहुँच गया।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: बून्दी, राजस्थान का फ़ैसला सिर्फ़ 28 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम था।

दूसरी ओर, इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर झालरापाटन, राजस्थान में रहा, जहाँ विजेता और दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार के बीच 68.9% वोटों का फ़ासला था।

इस चुनाव में सबसे ज़्यादा पुष्कर, राजस्थान में रहा, जहाँ 77.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला हवा महल, राजस्थान में था, जहाँ बैलट पर 16 उम्मीदवार थे।

पृष्ठभूमि

इस चुनाव में भी राजस्थान में एक ही पार्टी के शासन का वही दौर जारी रहा; सरकार नहीं बदली।

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 176 सीटें