भरतपुरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
नत्थी सिंह (निर्दलीय) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 29.8% वोट पाकर भरतपुर सीट जीती और होती लाल (INC) को 2,330 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में सीट नंबर 45 मालपुरा थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 45 बांदीकुई है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.3% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | नत्थी सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 13,11229.8% |
| 2 | होती लाल | 10,78224.5% | |
| 3 | करण सिंह स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 8,16318.5% |
| 4 | सूरज भान निर्दलीय | निर्दलीय | 4,42510.0% |
| 5 | चिरंजीत सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2,4715.6% |
| 6 | सावल प्रसाद SOC | SOC | 1,9694.5% |
| 7 | तुही राम | 1,3403.0% | |
| 8 | पोखन सिंह वाम दल | वाम दल | 6741.5% |
| 9 | तूफ़ानी राम निर्दलीय | निर्दलीय | 6671.5% |
| 10 | राम नारायण निर्दलीय | निर्दलीय | 4641.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 73% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.01 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।