लक्ष्मणगढ़विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1962
किशनसिंह (INC) ने 1962 के विधान सभा चुनाव में 28.3% वोट पाकर लक्ष्मणगढ़ सीट जीती और त्रिलोक सिंह (CPI) को 513 वोटों से हराया।
1962 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 में सीट नंबर 9 सीकर थी। 1962 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1967 से सीट नंबर 9 सूरतगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
लक्ष्मणगढ़ का फ़ैसला सिर्फ़ 1.5% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 513 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | किशनसिंह | 9,92328.3% | |
| 2 | त्रिलोक सिंह वाम दल | वाम दल | 9,41026.8% |
| 3 | नारायण सिंह स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 8,59924.5% |
| 4 | दुर्गा दत्त जालान निर्दलीय | निर्दलीय | 2,8898.2% |
| 5 | परमाराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1623.3% |
| 6 | मन्मथ कामेर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0663.0% |
| 7 | ईशर निर्दलीय | निर्दलीय | 8892.5% |
| 8 | बैजनाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 8182.3% |
| 9 | राम कुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 3080.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 80% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.50 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।