मंडावरविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
घासी राम यादव (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 42.6% वोट पाकर मंडावर सीट जीती और महेन्द्र शास्त्री (JD) को 8,988 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 59 राजगढ़ थी। 2003 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2008 से सीट नंबर 59 तिजारा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
13.2% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | घासी राम यादव | 28,98042.6% | |
| 2 | महेन्द्र शास्त्री जनता दल | जनता दल | 19,99229.4% |
| 3 | करण सिंह चौधरी | 17,12925.2% | |
| 4 | रूडा राम | 6210.9% | |
| 5 | जगदीश प्रजापति बेरीवाल निर्दलीय | निर्दलीय | 3370.5% |
| 6 | जगमाल सिंह | 2800.4% | |
| 7 | राम सरन निर्दलीय | निर्दलीय | 2390.3% |
| 8 | राम अवतार निर्दलीय | निर्दलीय | 2130.3% |
| 9 | अनिल शर्मा पातरकर निर्दलीय | निर्दलीय | 940.1% |
| 10 | सुरेश गुर्जर निर्दलीय | निर्दलीय | 840.1% |
| 11 | बाबू लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 440.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.02 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2008 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2008 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मंडावर से कौन जीता, 1977–2003
INC ने 1990 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 47.5% से घटकर 42.6% रह गया। 1977 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे एकतरफ़ा नतीजा था। मतदान प्रतिशत 1990 के 67.3% से घटकर 60.8% रह गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।