नई पार्टी आई, कांग्रेस टिकी रही
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी बनी रही, पर अकेले सरकार बनाने लायक सीटें कभी नहीं जीत पाई।
इसने 288 में से 75 सीटें जीतीं; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम।
इसके बाद शिवसेना 69 सीटों के साथ रही।
कांग्रेस को 27.2% वोट मिले और शिवसेना को 17.3%; राज्य के ज़्यादातर वोट भीड़ भरे मैदान के बाक़ी उम्मीदवारों में बिखर गए।
चुनाव प्रचार
नारायण राणे ने 1 फ़रवरी 1999 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और शिवसेना-भारतीय जनता पार्टी (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के नेता के रूप में मनोहर जोशी की जगह ली। उसी साल बाद में हुए विधान सभा चुनाव में उन्होंने उसी सरकार की अगुवाई की।1
शरद पवार, संगमा और तारिक़ अनवर को 20 मई 1999 को इंडियन नेशनल कांग्रेस से निकाल दिया गया, क्योंकि उन्होंने इटली में जन्मी नेता होने के नाते सोनिया गांधी के पार्टी की अगुवाई करने के अधिकार पर सवाल उठाया था। उन्होंने 10 जून 1999 को नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (राकांपा) बनाई।2
इसके बाद सितंबर के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस और नई राकांपा ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ उम्मीदवार उतारे; राज्य की 288 सीटों पर चुनाव से पहले उनके बीच सीटों के बँटवारे का कोई गठबंधन नहीं था।3
चुनाव आयोग ने मतदान 144-144 सीटों के दो चरणों में कराया, 5 सितंबर और 11 सितंबर 1999 को। गिनती अक्टूबर में हुई।4
क्या बदला
कांग्रेस महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी बनी रही, लेकिन पहली बार उसके सामने अपने ही नेताओं के अलग होने से बना एक गंभीर नया प्रतिद्वंद्वी था।
इस तरह लगातार 5 चुनावों में वह इसी स्थान पर रही।
सबसे बड़ा बदलाव कांग्रेस से नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की ओर रहा: जिन 159 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 33 इसी तरह बदलीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 12.1 प्रतिशत अंक गिरा।
अहम आँकड़े
सबसे क़रीबी मुक़ाबला दिग्रस, महाराष्ट्र में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 126 वोट रहा।
दूसरे छोर पर लातुर, महाराष्ट्र रही, जहाँ जीत का अंतर 43.5% वोट था।
किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत भिलवडी वांगी, महाराष्ट्र में रहा, 82.7%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से बेलापुर, महाराष्ट्र सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 8,90,784 नाम थे।
औरंगाबाद पश्चिम, महाराष्ट्र में किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार उतरे, बैलट पर 16 नाम थे।
प्रकाश आंबेडकर के भारिप बहुजन महासंघ ने पहली बार विधान सभा चुनाव लड़ा, 34 उम्मीदवार उतारे और 6,06,827 वोटों के साथ तीन सीटें जीतीं; उस साल महाराष्ट्र विधान सभा में पहली बार उतरने वाले तीन दलों में यह एक था।5
पृष्ठभूमि
शिवसेना के मनोहर जोशी 1995 में मुख्यमंत्री बने और उन्होंने महाराष्ट्र की पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।6
उस साल शिवसेना-भाजपा गठबंधन ने महाराष्ट्र की 288 विधान सभा सीटों में से कुल 138 सीटें जीती थीं, जो किसी भी अकेली पार्टी की अपनी सीटों से ज़्यादा थीं।6
सितंबर 1999 में जब राज्य में फिर मतदान हुआ, तब वही शिवसेना-भाजपा गठबंधन, अब नारायण राणे की अगुवाई में, सरकार चला रहा था।61