कांदिवलीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
मेहता प्रधुम्न उमियाशंकर (INC) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 49.5% वोट पाकर कांदिवली सीट जीती और जयप्रकाश ठाकुर (BJP) को 2,338 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 44 मालाड थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 44 आर्वी है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
कांदिवली का फ़ैसला सिर्फ़ 1.4% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 2,338 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मेहता प्रधुम्न उमियाशंकर | 79,56049.5% | |
| 2 | जयप्रकाश ठाकुर NDA | NDA | 77,22248.0% |
| 3 | अशोक संभाजी कासवकर निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7631.1% |
| 4 | जायसवाल लालचंद बाबूनंदन | 8670.5% | |
| 5 | ह्यूमनिस्ट निमेष जोशी THPI | THPI | 4720.3% |
| 6 | समीर सुधाकर जाधव निर्दलीय | निर्दलीय | 4700.3% |
| 7 | शेख फतेह मोहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 3960.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC और BJP को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.10 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कांदिवली से कौन जीता, 1978–2004
INC ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था; INC ने यहाँ पिछली बार 1990 में जीत दर्ज की थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 49.6% से घटकर 37.5% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1978उपाध्याय हसमुखभाई वसंतराय (JNP), जीत का अंतर 57.5%
- 1980ए. के. शाह (INC(I)), जीत का अंतर 5.7%
- 1985चंद्रकांत गोसालिया (INC), जीत का अंतर 20.4%
- 1990चंद्रकांत गोसालिया (INC), जीत का अंतर 9.3%
- 1995माधव मराठे (BJP), जीत का अंतर 8.0%
- 1999मेहता प्रधुम्न उमियाशंकर (INC), जीत का अंतर 1.4%
- 2004पी. यू. मेहता (INC), जीत का अंतर 6.4%