दिग्रसविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
देशमुख संजय उत्तमराव (निर्दलीय) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 25.1% वोट पाकर दिग्रस सीट जीती और बेग ख़्वाजा मस्तान (NCP) को 126 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 165 परभणी थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 165 अंधेरी पश्चिम है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
दिग्रस का फ़ैसला सिर्फ़ 0.1% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 126 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
10 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | देशमुख संजय उत्तमराव निर्दलीय | निर्दलीय | 26,41525.1% |
| 2 | बेग ख़्वाजा मस्तान | 26,28925.0% | |
| 3 | श्रीकांत उर्फ़ बालूभाऊ मुंगिनवार | 23,11022.0% | |
| 4 | सुधाकर जाधव BBM | BBM | 16,75115.9% |
| 5 | राठोड प्रताप लालसिंह | 4,9644.7% | |
| 6 | भोपिदास चिमना राठोड | 3,3973.2% | |
| 7 | जाधव सुधाकर बाबलाजी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,7081.6% |
| 8 | प्रल्हाद बोक्से पाटिल SJP(M) | SJP(M) | 1,2751.2% |
| 9 | शर्मा राजकुमार निर्दलीय | निर्दलीय | 8800.8% |
| 10 | विजयकुमार गुलाबराव बिहाडे निर्दलीय | निर्दलीय | 3110.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 72% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.92 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
दिग्रस से कौन जीता, 1978–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट SHS से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 71.7% से घटकर 60.4% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।
- 1978येमदवार नानासाहेब नारायणराव (IND), जीत का अंतर 40.3%
- 1980एंबडवार नानाभाऊ नारायणराव (INC(I)), जीत का अंतर 47.1%
- 1985ताजणे मानसाहेब सुर्यभानजी (INC), जीत का अंतर 12.7%
- 1990आडे प्रतापसिंग रामसिंग (INC), जीत का अंतर 22.4%
- 1995मुंगिनवार श्रीकांत वामनराव (SHS), जीत का अंतर 8.9%
- 1999देशमुख संजय उत्तमराव (IND), जीत का अंतर 0.1%
- 2004देशमुख संजय उत्तमराव (IND), जीत का अंतर 1.6%