त्रिशंकु विधान सभा, और कांग्रेस की भारी गिरावट
क्या हुआ
इस चुनाव के बाद कोई भी अकेली पार्टी महाराष्ट्र में अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती थी, और लंबे समय से राज्य पर राज कर रही कांग्रेस की अपनी सीटें भारी गिरावट के साथ घट गईं।
जनता पार्टी 288 में से 99 सीटों के साथ सबसे आगे रही, जो बहुमत से कम थीं; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम।
इंडियन नेशनल कांग्रेस घटकर सिर्फ़ 69 सीटों पर आ गई।
क्या बदला
यह पूरे राज्य में बढ़े हुए निर्वाचन क्षेत्रों पर हुआ पहला चुनाव भी था।
यह बदलाव (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के बाद आया।
विधान सभा में सीटों की संख्या 270 से बढ़कर 288 हो गई।
जीतने वाली पार्टी पिछले चुनाव के समय अस्तित्व में ही नहीं थी, और उसकी सीटें 0 से 99 हो गईं।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: हदगांव, महाराष्ट्र का फ़ैसला सिर्फ़ 6 वोटों से हुआ।
रालेगांव, महाराष्ट्र में विजेता की (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) साल में सबसे बड़ा रहा, 71.4% वोट।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) कागल, महाराष्ट्र में रहा, जहाँ 83.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
सबसे कम मतदान प्रतिशत कैज, महाराष्ट्र में रहा, जहाँ सिर्फ़ 39.1% मतदाताओं ने वोट डाला।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव पिछले चुनावों से बिल्कुल अलग राष्ट्रीय राजनीतिक माहौल में हुआ।