नई पार्टी थोड़ा आगे, बहुमत से पीछे
क्या हुआ
राज्य विधान सभा में एक नई पार्टी आगे निकली, अपनी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी से मामूली अंतर से।
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने 71 सीटें जीतीं, इंडियन नेशनल कांग्रेस की 69 सीटों से थोड़ा ही आगे।
इससे वह अपने दम पर 145 सीटों के बहुमत के आँकड़े से पीछे रह गई।
फिर भी कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) बड़ा रहा, राकांपा के 18.8% के मुक़ाबले 21.1%।
क्या बदला
सबसे ऊपर के कड़े मुक़ाबले के नीचे, सीटों के स्तर पर, काफ़ी उलटफेर छिपा था।
सबसे बड़ा बदलाव शिवसेना से राकांपा की ओर रहा: 20 निर्वाचन क्षेत्र इसी तरह बदले।
इस साल एक नई पार्टी ने भी विधान सभा में अपनी पहली सीटें जीतीं: जन सुराज्य शक्ति।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी फिर बढ़ा, पिछले चुनाव से 5.6 प्रतिशत अंक ज़्यादा।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: चंदगड, महाराष्ट्र का फ़ैसला सिर्फ़ 11 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, कराड दक्षिण, महाराष्ट्र में जीत का अंतर 74.1% वोट रहा, जो इस चुनाव में सबसे बड़ा था।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत कागल, महाराष्ट्र में रहा, 88.6%।
सबसे ज़्यादा मतदाता बेलापुर, महाराष्ट्र में थे, कुल 12,81,680 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम ने राज्य की दो सबसे बड़ी पार्टियों के बीच संतुलन को बेहद क़रीबी बनाए रखा।