कांग्रेस फिर सबसे आगे, पर बहुमत से दूर
क्या हुआ
अब राज्य में सबसे ज़्यादा सीटें एक दूसरी पार्टी के पास थीं, हालाँकि एक बार फिर कोई भी अकेली पार्टी अपने दम पर सरकार नहीं बना सकती थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 82 सीटें जीतीं, जो 145 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं।
(दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) में इसकी सहयोगी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने 62 सीटें और जोड़ीं; दोनों मिलकर 145 सीटों के आँकड़े से थोड़ा ही पीछे रहीं।
क्या बदला
यह (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के बाद हुआ पहला चुनाव भी था।
कांग्रेस ने इस बार 82 सीटें जीतीं, जबकि पिछले चुनाव में 69 जीती थीं।
पिछले चुनाव के बाद राज्य में राकांपा सबसे आगे थी; इस बार इसे 62 सीटें मिलीं और यह कांग्रेस के बाद दूसरे नंबर पर रही।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: कणकवली, महाराष्ट्र का फ़ैसला सिर्फ़ 34 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, भोकर, महाराष्ट्र में जीत का अंतर 70.9% वोट रहा, जो इस चुनाव में सबसे बड़ा था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) करवीर, महाराष्ट्र में रहा, 83.8%।
सबसे ज़्यादा मतदाता चिंचवड, महाराष्ट्र में थे, कुल 3,91,857 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
परिणामों में राज्य की वही बँटी हुई, कई दलों वाली तस्वीर दिखी, जो हाल के चुनावों से जानी-पहचानी थी।