महाराष्ट्र की पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार
क्या हुआ
कांग्रेस ने किसी भी दूसरी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन उसकी सीटें तेज़ी से घटीं और बहुमत से काफ़ी पीछे रह गईं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 288 सीटों में से 80 सीटें जीतीं।
शिवसेना 73 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
अकेले निर्दलीयों ने 45 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव में कांग्रेस की अपनी स्थिति काफ़ी कमज़ोर हुई, हालाँकि उसने अब भी किसी भी दूसरी अकेली पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं।
इसकी सीटें 141 से घटकर 80 रह गईं।
इस तरह कांग्रेस लगातार 4 चुनावों में राज्य की सबसे बड़ी पार्टी रही।
28 सीटें सीधे कांग्रेस से निर्दलीय उम्मीदवारों के पास चली गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 69.9% तक पहुँचा, जो महाराष्ट्र के किसी भी विधान सभा चुनाव में दर्ज सबसे ऊँचा स्तर है।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला शेवगांव, महाराष्ट्र में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 12 वोट रहा।
सबसे ज़्यादा मतदाता बेलापुर, महाराष्ट्र सीट पर थे, 9,44,365 पंजीकृत मतदाता।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला बडनेरा, महाराष्ट्र में था, जहाँ एक सीट के लिए 47 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
कांग्रेस ने अब भी किसी भी दूसरी अकेली पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन इस बार राज्य में सरकार एक दूसरे (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) ने बनाई।