कांग्रेस बहुमत से पीछे, शिवसेना का उभार
क्या हुआ
कांग्रेस महाराष्ट्र की सबसे बड़ी पार्टी बनी रही लेकिन बहुमत से पीछे रह गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 288 में से 141 सीटें जीतीं; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) परिणाम।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी शिवसेना ने 52 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव की सबसे बड़ी बात यह रही कि एक विपक्षी पार्टी कितनी तेज़ी से बढ़ी और कांग्रेस को छोड़कर हर पार्टी से आगे निकल गई।
32 सीटें सीधे कांग्रेस से शिवसेना के पास गईं, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
शिवसेना के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) बढ़कर 15.9% हो गया।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला नागपुर मध्य, महाराष्ट्र में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 6 वोट रहा।
दूसरी ओर, साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर बारामती, महाराष्ट्र में रहा, जहाँ पहले और दूसरे स्थान के बीच 75.1% वोटों का फ़ासला था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) माटुंगा, महाराष्ट्र में रहा, जहाँ यह 95.0% तक पहुँचा।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला औरंगाबाद पश्चिम, महाराष्ट्र में था, जहाँ एक सीट के लिए 43 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव तक महाराष्ट्र का विपक्ष उस विपक्ष से अलग दिखने लगा था, जिसका सामना कांग्रेस ने पिछले दशक भर किया था; एक नई क्षेत्रीय पार्टी उसकी सबसे गंभीर प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी।