कांग्रेस की पकड़ और मज़बूत
क्या हुआ
कांग्रेस ने राज्य विधान सभा पर अपनी मज़बूत पकड़ बनाए रखी और महाराष्ट्र की राजनीति में अपना दबदबा आगे बढ़ाया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 270 सीटों में से 222 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 86 सीटें ज़्यादा था।
अगला सबसे बड़ा समूह निर्दलीय उम्मीदवारों का था, जिन्होंने मिलकर 23 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह महाराष्ट्र में कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत भी थी, जीतों के उस सिलसिले का हिस्सा जो राज्य के शुरुआती चुनावों से चला आ रहा था।
पार्टी की अपनी सीटें 203 से बढ़कर 222 हो गईं, जो तब तक राज्य में इसका सबसे अच्छा परिणाम था।
लगभग 58.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से थोड़ा कम था।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: अड्यार, महाराष्ट्र का फ़ैसला सिर्फ़ 90 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरे छोर पर, पाटण, महाराष्ट्र में साल का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ पहले दो उम्मीदवारों के बीच 96.9% वोटों का फ़ासला था।
राज्य भर में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) में बड़ा फ़र्क़ रहा: सबसे ज़्यादा पुसद, महाराष्ट्र में, 81.0%।
सबसे कम गंगाखेड, महाराष्ट्र में रहा, सिर्फ़ 26.9%।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव महाराष्ट्र के राज्य बनने के शुरुआती दौर में हुआ, पुराने बम्बई राज्य से अलग होने के कुछ ही समय बाद।