कागलविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1972
मंडलिक सदाशिव दादोबा (निर्दलीय) ने 1972 के विधान सभा चुनाव में 49.1% वोट पाकर कागल सीट जीती और निकम दौलतराव अप्पाजी (INC) को 1,624 वोटों से हराया।
1967 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1962 में कोई सीट नंबर 268 नहीं थी। 1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1978 से सीट नंबर 268 शिराला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। मंडलिक सदाशिव दादोबा 2.3% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मंडलिक सदाशिव दादोबा निर्दलीय | निर्दलीय | 34,60849.1% |
| 2 | निकम दौलतराव अप्पाजी कांग्रेस (आर) | कांग्रेस (आर) | 32,98446.8% |
| 3 | बागल विमलाबाई वसंतराव | 1,1861.7% | |
| 4 | कांबले कोंडीराम ज्योति RPK | RPK | 1,0631.5% |
| 5 | घौगले दिनकर कृष्ण निर्दलीय | निर्दलीय | 6380.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और INC को 96% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.17 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कागल से कौन जीता, 1967–1972
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 69.0% से बढ़कर 72.6% हो गया।
- 1967डी. ए. निकम (INC), जीत का अंतर 11.0%
- 1972मंडलिक सदाशिव दादोबा (IND), जीत का अंतर 2.3%