इगतपुरीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
गंगाध पांडुरंग चापू (बाबा) (SHS) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 30.0% वोट पाकर इगतपुरी सीट जीती और दमसे वसंत माधवराव (INC) को 628 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 66 नांदगांव थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 66 आमगांव है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
इगतपुरी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.9% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 628 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
7 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गंगाध पांडुरंग चापू (बाबा) शिवसेना-BJP युति (NDA गठबंधन) | शिवसेना-BJP युति (NDA गठबंधन) | 21,80730.0% |
| 2 | दमसे वसंत माधवराव | 21,17929.1% | |
| 3 | झोले शिवराम शंकर | 20,57228.3% | |
| 4 | मेंगाल काशिनाथ दगडू | 3,7655.2% | |
| 5 | लांडे मधुकर मानाजी निर्दलीय | निर्दलीय | 3,7215.1% |
| 6 | घोडे मनोहर भिकाजी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2151.7% |
| 7 | वारे मंगेश सकरू निर्दलीय | निर्दलीय | 4900.7% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 87% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.84 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
इगतपुरी से कौन जीता, 1978–2004
SHS ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1978 से शुरू होता है, यह SHS की पहली जीत थी। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 69.2% से घटकर 46.0% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में भी SHS ने यह सीट अपने पास रखी।
- 1978वाघ भाऊ सकरू (INC(I)), जीत का अंतर 13.9%
- 1980घारे विठ्ठलराव गणपत (INC(I)), जीत का अंतर 13.6%
- 1985झोले शिवराम शंकर (ICS), जीत का अंतर 7.6%
- 1990यादवराव आनंदराव बांबले (BJP), जीत का अंतर 4.3%
- 1995झोले शिवराम शंकर (INC), जीत का अंतर 6.6%
- 1999गंगाध पांडुरंग चापू (बाबा) (SHS), जीत का अंतर 0.9%
- 2004मेंगाल काशिनाथ दगडू (SHS), जीत का अंतर 7.1%