देवलालीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
घोलप बबन शंकर (निर्दलीय) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 47.0% वोट पाकर देवलाली सीट जीती और साधाफुले रामदास दयाराम (बाबा) (NCP) को 3,708 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 68 दाभाडी थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 68 गडचिरोली है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
नज़दीकी मुक़ाबला। घोलप बबन शंकर 3.0% के अंतर से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | घोलप बबन शंकर निर्दलीय | निर्दलीय | 58,65747.0% |
| 2 | साधाफुले रामदास दयाराम (बाबा) | 54,94944.0% | |
| 3 | पवार विलास सीताराम BBM | BBM | 7,0165.6% |
| 4 | एड. अरविन्द हरिभाऊ पठाडे निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3701.1% |
| 5 | भागवत लक्ष्मण कानडे निर्दलीय | निर्दलीय | 8850.7% |
| 6 | गायकवाड सुरेश काशिनाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 6730.5% |
| 7 | प्रकाश भिमराव बागुल निर्दलीय | निर्दलीय | 6400.5% |
| 8 | डॉ. राजेन्द्र रामचंद्र जाधव (एम.एस.) निर्दलीय | निर्दलीय | 4070.3% |
| 9 | भालेराव सुरेश पांडुरंग (एस.पी.) निर्दलीय | निर्दलीय | 1680.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, NCP और BBM को 97% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.39 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
देवलाली से कौन जीता, 1978–2004
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट SHS से छीन ली, जिसने इसे 1995 में जीता था। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 60.0% से घटकर 44.2% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट SHS ने जीती।
- 1978अहिरे बाबुराव सोमा (बबला) (IND), जीत का अंतर 37.0%
- 1980अहिरे बाबूलाल सोमा (INC(U)), जीत का अंतर 18.3%
- 1985दोंदे भीकचंद हरिभाऊ (BJP), जीत का अंतर 6.5%
- 1990घोलप बबन शंकर (SHS), जीत का अंतर 34.3%
- 1995घोलप बबन शंकर (SHS), जीत का अंतर 22.4%
- 1999घोलप बबन शंकर (IND), जीत का अंतर 3.0%
- 2004घोलप बबन (नाना) शंकर (SHS), जीत का अंतर 3.2%