भांडुपविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1999
डाके लिलाधर बालाजी (SHS) ने 1999 के विधान सभा चुनाव में 42.1% वोट पाकर भांडुप सीट जीती और संजय दिना पाटिल (NCP) को 8,756 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 51 उल्हासनगर थी। 2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 51 उमरेड है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.7% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | डाके लिलाधर बालाजी शिवसेना-BJP युति (NDA गठबंधन) | शिवसेना-BJP युति (NDA गठबंधन) | 64,32842.1% |
| 2 | संजय दिना पाटिल | 55,57236.4% | |
| 3 | एड. अशोक गजानन तलवटकर | 22,54914.8% | |
| 4 | पोपटराव पांडुरंग अडंगले | 4,4993.0% | |
| 5 | चन्द्रशेखर एम. शेट्टी निर्दलीय | निर्दलीय | 1,6601.1% |
| 6 | ए.के. मैनी ABHS | ABHS | 1,6331.1% |
| 7 | सुखदेव चंदू दांडगे निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3960.9% |
| 8 | डॉ. अजीत लक्ष्मण मालुसरे निर्दलीय | निर्दलीय | 9760.6% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
SHS, NCP और RPI को 93% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.00 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
भांडुप से कौन जीता, 1978–2004
SHS ने यहाँ लगातार तीसरी बार जीत दर्ज की; जीत का यह सिलसिला 1990 में शुरू हुआ था। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 48.0% से घटकर 42.1% रह गया। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1995 के 62.2% से घटकर 47.5% रह गया। इसके बाद 2004 के चुनाव में यह सीट NCP ने जीती।
- 1978संझगिरी प्रभाकर पांडुरंग (CPM), जीत का अंतर 28.7%
- 1980शेरेकर वामन रामचंद्र (INC(I)), जीत का अंतर 11.2%
- 1985शेकरकर वामन रामचंद्र (INC), जीत का अंतर 20.9%
- 1990डाके लिलाधर बालाजी (SHS), जीत का अंतर 7.8%
- 1995एड. लिलाधर बालाजी डाके (SHS), जीत का अंतर 11.4%
- 1999डाके लिलाधर बालाजी (SHS), जीत का अंतर 5.7%
- 2004संजय दिना पाटिल (NCP), जीत का अंतर 3.2%