कांग्रेस की ज़ोरदार वापसी
क्या हुआ
इंडियन नेशनल लोक दल फिर सत्ता से बाहर हुई, और इंडियन नेशनल कांग्रेस सुरक्षित अंतर से जीती।
कांग्रेस ने 90 में से 67 सीटें जीतीं — किसी भी पैमाने से यह भारी जीत थी।
इससे वह 46 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 21 सीटें आगे रही।
दूसरे स्थान पर रही निर्दलीय सिर्फ़ 10 सीटें जीत पाई — विजेता की सीटों का छोटा-सा हिस्सा।
क्या बदला
इस चुनाव से पहले सरकार चला रही पार्टी गिनी-चुनी सीटों पर सिमट गई।
वह पार्टी इंडियन नेशनल लोक दल थी।
कांग्रेस की स्थिति उलटी रही: उसकी सीटें 21 से बढ़कर 67 हो गईं।
यह विधान सभा का 74.4% था — सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 46 सीटों से काफ़ी ज़्यादा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर घरौंडा, हरियाणा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 21 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर आदमपुर, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 63.7% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) रोड़ी, हरियाणा में रहा, 88.0%।
सबसे भरा हुआ बैलट हिसार, हरियाणा में था, जहाँ इस सीट के लिए 22 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव उसी नक्शे पर लड़ा गया जो दशकों पहले विधान सभा की सीमाएँ आख़िरी बार नए सिरे से तय होने के बाद से इस्तेमाल हो रहा था।