कांग्रेस की वापसी, पर बहुमत के बिना
क्या हुआ
कांग्रेस सत्ता में लौटी, लेकिन अपने दम पर बहुमत के बिना।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 90 में से 36 सीटें जीतीं — जो 46 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी लोक दल ने 31 सीटें जीतीं, और बाक़ी सीटें निर्दलीयों और छोटे दलों में बँट गईं।
क्या बदला
पिछले चुनाव के मुक़ाबले राज्य की लगभग हर सीट पर पार्टी बदली, फिर भी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
राज्य की 90 सीटों में से 86 सीटों पर इस बार दूसरी पार्टी जीती।
सबसे बड़ा बदलाव यह था कि 29 सीटें जनता पार्टी से कांग्रेस के पास गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला सढौरा, हरियाणा में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 10 वोट रहा, जो उस साल कहीं भी हुए सबसे कड़े मुक़ाबलों में से एक था।
दूसरी ओर, तोशाम, हरियाणा में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 46.8% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नरवाना, हरियाणा में रहा, जहाँ यह 79.8% तक पहुँचा।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता फरीदाबाद, हरियाणा में थे, मतदाता सूची में 1,14,517 लोग थे।
पृष्ठभूमि
पिछले चुनाव में भारी जीत दर्ज करने वाली पार्टी इस चुनाव तक ढह चुकी थी।
यह पहली बार भी था जब लोक दल और भाजपा ने हरियाणा की विधान सभा में सीटें जीतीं।