मुलानाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1982
फूल चन्द (निर्दलीय) ने 1982 के विधान सभा चुनाव में 58.5% वोट पाकर मुलाना सीट जीती और शेर सिंह (INC) को 14,333 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 7 नग्गल थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 7 सढौरा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — फूल चन्द 25.6% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
11 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | फूल चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 32,72758.5% |
| 2 | शेर सिंह कांग्रेस (इंदिरा) | कांग्रेस (इंदिरा) | 18,39432.9% |
| 3 | नर सिंह Lok Dal | Lok Dal | 2,0463.7% |
| 4 | बलवंत सिंह जनता | जनता | 6441.1% |
| 5 | नन्द राम निर्दलीय | निर्दलीय | 5691.0% |
| 6 | संत राम निर्दलीय | निर्दलीय | 5250.9% |
| 7 | धर्म पाल निर्दलीय | निर्दलीय | 4430.8% |
| 8 | हिरदा राम निर्दलीय | निर्दलीय | 2290.4% |
| 9 | जोगिंदर राम निर्दलीय | निर्दलीय | 1750.3% |
| 10 | राम रतन लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 1380.3% |
| 11 | राम प्रसाद निर्दलीय | निर्दलीय | 500.1% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, असल में दो दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय और INC को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.21 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मुलाना से कौन जीता, 1977–2005
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट JNP से छीन ली, जिसने इसे 1977 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1977 के 66.7% से बढ़कर 73.8% हो गया। इसके बाद 1987 के चुनाव में यह सीट BJP ने जीती।