नई पार्टी की पहली ही बार में भारी जीत
क्या हुआ
एक बिल्कुल नई पार्टी ज़ोरदार जीत के साथ सत्ता में आई और राज्य विधान सभा पर कांग्रेस की लगातार चली आ रही पकड़ ख़त्म कर दी।
जनता पार्टी ने कुल 90 सीटों में से 75 सीटें जीतीं, हर लिहाज़ से यह एकतरफ़ा जीत थी।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 29 सीटें ज़्यादा था।
उसके बाद सबसे ज़्यादा सीटें निर्दलीय के उम्मीदवारों को मिलीं, जिन्होंने मिलकर 7 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के बाद बढ़ी हुई विधान सभा का पहला चुनाव भी था, जिसमें नई सीटें जुड़ी थीं।
हरियाणा की विधान सभा 81 सीटों से बढ़कर 90 सीटों की हो गई।
जीतने वाली पार्टी पिछले चुनाव के समय अस्तित्व में ही नहीं थी, और उसकी सीटें 0 से 75 हो गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला रेवाड़ी, हरियाणा में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 86 वोट रहा।
दूसरी ओर, असन्ध, हरियाणा में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 59.9% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) छछरौली, हरियाणा में रहा, जहाँ यह 74.3% तक पहुँचा।
उस साल सबसे ज़्यादा पंजीकृत मतदाता जाटूसाना, हरियाणा में थे, 81,681।
पृष्ठभूमि
यह बड़ी विधान सभा देश भर में सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय होने के बाद बनी।