कांग्रेस की वापसी, पर बहुमत के बिना
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस सत्ता में बनी रही, लेकिन इस बार अकेले सरकार बनाने लायक़ सीटों के बिना।
कांग्रेस ने 90 में से 40 सीटें जीतीं — बहुमत से कम।
इससे सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
दूसरे स्थान पर रही इंडियन नेशनल लोक दल ने 31 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इसी पार्टी ने सिर्फ़ एक चुनाव पहले कहीं ज़्यादा सीटें जीती थीं।
उसकी सीटें 67 से 40 हो गईं।
लगभग 72.3% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस समय तक राज्य में सबसे ज़्यादा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर दादरी, हरियाणा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 145 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर गढ़ी सांपला-किलोई, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 64.1% वोट आगे रहा।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) डबवाली, हरियाणा में दर्ज हुआ, 87.3%।
सबसे भरा हुआ बैलट पुनहाना, हरियाणा में था, जहाँ इस सीट के लिए 25 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
अब इस पार्टी की सत्ता एक से ज़्यादा चुनावों तक फैल चुकी है।
अब वह लगातार 2 चुनाव जीत चुकी है।