कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत
क्या हुआ
कांग्रेस लगातार तीसरे चुनाव में सत्ता में बनी रही।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 81 सीटों में से 52 सीटें जीतीं।
इससे उसका (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 46.9% रहा।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस (संगठन) ने राज्य में पहली बार सीटें जीतीं, कुल 12।
क्या बदला
इस साल सबसे साफ़ बदलाव यह था कि कांग्रेस के एक क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी की सीटें उसकी ओर चली गईं।
राज्य की 81 सीटों में से 49 सीटों पर पिछले चुनाव के मुक़ाबले जीतने वाली पार्टी बदल गई।
सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि 12 सीटें विशाल हरियाणा पार्टी से कांग्रेस के पास चली गईं।
उस क्षेत्रीय पार्टी की अपनी सीटें बुरी तरह घट गईं।
अहम आँकड़े
परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ी टक्कर सफीदों, हरियाणा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 108 वोट रहा।
इसके उलट सबसे बड़ा जीत का अंतर डबवाली, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता कुल वोटों के 70.2% के अंतर से आगे रहे।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) कैथल, हरियाणा में रहा, जहाँ यह 78.4% तक पहुँचा।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता फरीदाबाद, हरियाणा में थे, जहाँ मतदाता सूची में 98,377 लोग दर्ज थे।
पृष्ठभूमि
तब तक कांग्रेस के लिए यह कोई नया सिलसिला नहीं था।
इस चुनाव को मिलाकर वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।
तब हरियाणा एक नया राज्य था, जो कुछ ही साल पहले बना था।