हरियाणा 1968 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 48 सीटें (59.3%)VHP: 16 सीटें (19.8%)BJS: 7 सीटें (8.6%)IND: 6 सीटें (7.4%)SWA: 2 सीटें (2.5%)BKD: 1 सीट (1.2%)RPI: 1 सीट (1.2%)बहुमत के लिए 4181सरकार बनाने के लिए 41
  • INC4859.3%
  • VHP1619.8%
  • BJS78.6%
  • निर्दलीय67.4%
  • SWA22.5%
  • BKD11.2%
  • RPI11.2%
चुनाव की कहानी

उतनी ही सीटें, नया विपक्ष

क्या हुआ

एक बिल्कुल नए विपक्ष के सामने इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर सत्ता में बनी रही।

कांग्रेस ने कुल 81 सीटों में से 48 सीटें जीतीं।

यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 7 सीटें ज़्यादा था।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी विशाल हरियाणा पार्टी ने 16 सीटें जीतीं और उसका 14.9% रहा।

क्या बदला

दोनों चुनावों के बीच कांग्रेस की अपनी सीटें ज़रा भी नहीं बदलीं।

उसने पहली बार 48 सीटें जीती थीं और इस बार भी 48।

निर्दलीयों के वोट बुरी तरह ढह गए, और उनकी जीती हुई 11 सीटें इस बार कांग्रेस के पास चली गईं।

सीटें उतनी ही रहने के बावजूद उसका मतों का हिस्सा फिर भी 2.5 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: घरौंडा, हरियाणा में सिर्फ़ 12 वोट रहा।

दूसरी ओर, मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर नारायणगढ़, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता 49.5% वोटों से आगे रहा।

सबसे ज़्यादा कैथल, हरियाणा में रहा, जहाँ यह 70.8% तक पहुँचा।

किसी भी सीट से ज़्यादा मतदाता फरीदाबाद, हरियाणा में थे, जहाँ 70,045 मतदाता पंजीकृत थे।

पृष्ठभूमि

1967 में चुनी गई राज्य की पहली विधान सभा अपना पूरा कार्यकाल नहीं चला पाई।

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 81 सीटें