बरवालाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1968
गोरधन दास (INC) ने 1968 के विधान सभा चुनाव में 45.9% वोट पाकर बरवाला सीट जीती और पीर चन्द (BKD) को 371 वोटों से हराया।
1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 74 हिसार है।
विजेता
बरवाला का फ़ैसला सिर्फ़ 1.7% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 371 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
3 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | गोरधन दास | 9,91945.9% | |
| 2 | पीर चन्द | 9,54844.2% | |
| 3 | छबील दास स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 2,1469.9% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, BKD और SWA को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.41 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
बरवाला से कौन जीता, 1967–1972
INC ने 1967 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 53.8% से घटकर 45.9% रह गया। मतदान प्रतिशत 1967 के 68.4% से घटकर 39.1% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट NCO ने जीती।