पटौदीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1968
रामजीवन सिंह (VHP) ने 1968 के विधान सभा चुनाव में 47.2% वोट पाकर पटौदी सीट जीती और सीस राम (SWA) को 5,628 वोटों से हराया।
1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 55 हसनपुर है।
विजेता
13.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
5 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रामजीवन सिंह VHP | VHP | 20,30647.2% |
| 2 | सीस राम स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 14,67834.1% |
| 3 | जगमाल सिंह | 7,26916.9% | |
| 4 | नेपाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3790.9% |
| 5 | रणधीर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 3580.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
VHP, SWA और INC को 98% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.71 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पटौदी से कौन जीता, 1967–1972
VHP ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 76.5% से घटकर 68.2% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट INC ने जीती।