त्रिशंकु विधान सभा, और एक नई पार्टी की शुरुआत
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी सत्ता में बनी रही, लेकिन फिर अपने दम पर बहुमत के बिना।
भाजपा ने 90 सीटों में से 40 सीटें जीतीं।
इससे सदन (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) रहा।
दूसरे स्थान पर रही इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 31 सीटें जीतीं।
क्या बदला
पिछली बार अकेले सरकार चलाने वाली पार्टी की ज़मीन कुछ खिसकी, और एक नई क्षेत्रीय पार्टी पहली बार विधान सभा में पहुँची।
भाजपा की सीटें 47 से 40 हो गईं।
लगभग 68.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला; राज्य ने हाल ही में जो रिकॉर्ड बनाया था, उससे यह -8.1 प्रतिशत अंक बदला।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर सिरसा, हरियाणा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 602 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर गढ़ी सांपला-किलोई, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 39.3% वोट आगे रहा।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ऐलनाबाद, हरियाणा में दर्ज हुआ, 83.2%।
सबसे भरा हुआ बैलट हांसी, हरियाणा में था, जहाँ इस सीट के लिए 25 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस राज्य की विधान सभा में पहले भी नए क्षेत्रीय दावेदार उतरे हैं, जिन्होंने दोनों मुख्य दलों की सत्ता पर पकड़ को परखा।