हाशिए से मामूली बहुमत तक
क्या हुआ
यहाँ नई सरकार सत्ता में आई, और उतने ही कम अंतर से जीती जितना बहुमत के लिए मुमकिन है।
भारतीय जनता पार्टी ने 90 सीटों में से 47 सीटें जीतीं।
इससे वह सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 46 सीटों के आँकड़े से सिर्फ़ 1 सीटें ऊपर रही।
दूसरे स्थान पर रही इंडियन नेशनल लोक दल ने 19 सीटें जीतीं।
क्या बदला
सत्ता से जा रही सरकार की अपनी सीटें भारी गिरावट के साथ ढह गईं — राज्य के चुनावी इतिहास की सबसे तीखी गिरावटों में से एक।
वह पार्टी इंडियन नेशनल कांग्रेस थी।
लगभग 76.2% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो राज्य में अब तक का सबसे ऊँचा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) था।
सबसे बड़ा बदलाव यह था कि 22 सीटें सीधे कांग्रेस से भाजपा के पास गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर राई, हरियाणा में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 3 वोट रहा।
सबसे बड़ा जीत का अंतर करनाल, हरियाणा में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 45.4% वोट आगे रहा।
किसी एक सीट पर सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत ऐलनाबाद, हरियाणा में दर्ज हुआ, 89.2%।
सबसे भरा हुआ बैलट भिवानी, हरियाणा में था, जहाँ इस सीट के लिए 31 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस राज्य में मुक़ाबले अक्सर इससे ज़्यादा क़रीबी रहे हैं।