लगातार तीसरी जीत, बेहद कम अंतर से
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने हरियाणा में फिर जीत हासिल की और इंडियन नेशनल कांग्रेस को पीछे रखा।
उसने 90 सीटों में से 48 सीटें जीतीं।
अब वह लगातार 3 चुनाव जीत चुकी है।
इससे वह 46 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 2 सीटें आगे रही।
कांग्रेस वोटों में लगभग बराबरी पर रही: 39.1%, जबकि विजेता को 39.9%।
चुनाव प्रचार
12 मार्च 2024 को भाजपा और जननायक जनता पार्टी का (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) टूटने के बाद मनोहर लाल खट्टर ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया, और उसी दिन नायब सिंह सैनी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।1
जुलाई में इंडियन नेशनल लोक दल और बहुजन समाज पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ने के लिए गठबंधन की घोषणा की। कांग्रेस ने 15 जुलाई को "हरियाणा माँगे हिसाब अभियान" शुरू किया, जो सभी 90 विधान सभा सीटों तक पहुँचा, ताकि उसके शब्दों में राज्य सरकार की नाकामियाँ सामने लाई जा सकें।23
अगस्त में जननायक जनता पार्टी ने, जिसका भाजपा से गठबंधन मार्च में टूट चुका था, आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के साथ अपने गठबंधन की घोषणा की।4
चुनाव आयोग ने 16 अगस्त को चुनाव कार्यक्रम घोषित किया और 1 अक्टूबर को एक चरण में मतदान तय किया। 31 अगस्त को उसने तारीख़ बदलकर 5 अक्टूबर कर दी, और मतगणना 8 अक्टूबर को रखी।56
6 सितंबर को पहलवान विनेश फोगाट कांग्रेस में शामिल हुईं, जिसने उन्हें जुलाना सीट से उम्मीदवार बनाया। 12 सितंबर को कांग्रेस ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) के साथ गठबंधन की भी घोषणा की।78
क्या बदला
इस परिणाम के बाद विधान सभा बहुत कम दलों में बँटी।
कुल 4 दलों ने कोई सीट जीती, और 3 सीटें निर्दलीयों को मिलीं।
भाजपा की अपनी सीटें 40 से बढ़कर 48 हो गईं।
सबसे बड़ा बदलाव कांग्रेस से भाजपा की ओर रहा: पार्टी बदलने वाली 49 सीटों में से 14 इसी तरह गईं।
अहम आँकड़े
सबसे कड़ा मुक़ाबला उचाना कलां, हरियाणा में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 32 वोट रहा।
सबसे बड़ी जीत फिरोजपुर झिरका, हरियाणा में हुई, 54.3% वोटों के अंतर से।
ऐलनाबाद, हरियाणा में किसी भी सीट से ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दर्ज हुआ, 81.0%।
सबसे ज़्यादा उम्मीदवार हिसार, हरियाणा में उतरे, बैलट पर 21 नाम थे।
पूरे राज्य में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 53,300 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 0.4%।
पृष्ठभूमि
हरियाणा 1 नवंबर 1966 को पंजाब के हिंदी-बहुल ज़िलों को अलग करके एक अलग राज्य बना, और उसकी विधान सभा में 81 सीटें थीं।9
बाद में (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) आयोग के एक आदेश से विधान सभा 81 से बढ़कर 90 सीटों की हुई; इसका पहला इस्तेमाल 1977 के चुनाव में हुआ, जब जनता पार्टी ने 90 में से 75 सीटें जीतीं और सत्ता से जा रही कांग्रेस 3 पर सिमट गई।10
इस चुनाव में उतरी जननायक जनता पार्टी दिसंबर 2018 में इंडियन नेशनल लोक दल से टूटकर बनी थी।11