घरौंडाविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1968
रणधीर सिंह (BJS) ने 1968 के विधान सभा चुनाव में 23.8% वोट पाकर घरौंडा सीट जीती और रुल्या राम (SWA) को 12 वोटों से हराया।
1972 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1977 से सीट नंबर 17 पानीपत है।
विजेता
घरौंडा का फ़ैसला सिर्फ़ 0.0% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 12 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | रणधीर सिंह Bharatiya Jana Sangh | Bharatiya Jana Sangh | 7,76623.8% |
| 2 | रुल्या राम स्वतंत्र पार्टी | स्वतंत्र पार्टी | 7,75423.8% |
| 3 | राजेन्द्र पाल | 7,65323.4% | |
| 4 | सुब्बा सिंह वाम दल | वाम दल | 3,63211.1% |
| 5 | मुल्तान सिंह VHP | VHP | 2,5948.0% |
| 6 | आसा निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2263.8% |
| 7 | दलीप सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0823.3% |
| 8 | कन्हैया निर्दलीय | निर्दलीय | 5131.6% |
| 9 | बाबू राम निर्दलीय | निर्दलीय | 4091.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 71% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.27 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
घरौंडा से कौन जीता, 1967–1972
BJS ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1967 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1967 के 71.9% से घटकर 56.6% रह गया। इसके बाद 1972 के चुनाव में यह सीट NCO ने जीती।