पाईविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2005
तेजेंदर पाल सिंह (निर्दलीय) ने 2005 के विधान सभा चुनाव में 35.2% वोट पाकर पाई सीट जीती और राम पाल (INLD) को 6,502 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 27 नरवाना थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 27 समालखा है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.0% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | तेजेंदर पाल सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 32,43735.2% |
| 2 | राम पाल NDA | NDA | 25,93528.1% |
| 3 | सज्जन सिंह UPA | UPA | 25,74927.9% |
| 4 | नर सिंह ढांडा NDA | NDA | 2,6182.8% |
| 5 | दीपा | 1,8422.0% | |
| 6 | फौजी हवा सिंह ढुल ES | ES | 1,5321.7% |
| 7 | राम फल निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0301.1% |
| 8 | ईश्वर निर्दलीय | निर्दलीय | 7210.8% |
| 9 | जगदीश निर्दलीय | निर्दलीय | 3720.4% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
पाई से कौन जीता, 1977–2005
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INLD से छीन ली, जिसने इसे 2000 में जीता था। मतदान प्रतिशत 2000 के 73.0% से बढ़कर 81.7% हो गया।