सढौराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 2005
बलवंत सिंह (INLD) ने 2005 के विधान सभा चुनाव में 32.1% वोट पाकर सढौरा सीट जीती और दीप चन्द (निर्दलीय) को 8,442 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 3 छछरौली थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 3 नारायणगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
7.6% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
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| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | बलवंत सिंह | 35,66432.1% | |
| 2 | दीप चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 27,22224.5% |
| 3 | रामजी लाल UPA | UPA | 24,98922.5% |
| 4 | लाल चन्द | 11,46410.3% | |
| 5 | दाता राम NDA | NDA | 6,2415.6% |
| 6 | मोहिंदर सिंह ES | ES | 1,5391.4% |
| 7 | अरुण कुमार | 1,5301.4% | |
| 8 | राम प्रकाश निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3921.3% |
| 9 | बलकार सिंह UPA | UPA | 9030.8% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 79% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.37 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सढौरा से कौन जीता, 1977–2005
INLD ने 2000 में जीती यह सीट फिर से अपने पास रखी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत लगभग पहले जितना ही रहा: 32.1%। मतदान प्रतिशत 2000 के 77.1% से बढ़कर 81.5% हो गया।