सढौराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1987
भाग मल (निर्दलीय) ने 1987 के विधान सभा चुनाव में 53.2% वोट पाकर सढौरा सीट जीती और शेर सिंह (INC) को 16,008 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 3 छछरौली थी। 2005 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 3 नारायणगढ़ है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — भाग मल 22.9% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | भाग मल निर्दलीय | निर्दलीय | 37,24653.2% |
| 2 | शेर सिंह | 21,23830.4% | |
| 3 | डी.डी. कश्यप निर्दलीय | निर्दलीय | 5,7638.2% |
| 4 | करम चन्द वाम दल | वाम दल | 3,7325.3% |
| 5 | रामजी लाल निर्दलीय | निर्दलीय | 8691.2% |
| 6 | ज्ञान चन्द निर्दलीय | निर्दलीय | 6320.9% |
| 7 | अमर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2860.4% |
| 8 | श्री राम सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 2220.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, INC और एक निर्दलीय को 92% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.60 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
सढौरा से कौन जीता, 1977–2005
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट BJP से छीन ली, जिसने इसे 1982 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1982 के 65.2% से बढ़कर 74.5% हो गया। इसके बाद 1991 के चुनाव में यह सीट एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती।