पंजाब 1985 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
SAD: 73 सीटें (62.4%)INC: 32 सीटें (27.4%)BJP: 6 सीटें (5.1%)IND: 4 सीटें (3.4%)CPI: 1 सीट (0.9%)JNP: 1 सीट (0.9%)बहुमत के लिए 59117सरकार बनाने के लिए 59
चुनाव की कहानी

पंजाब समझौते के बाद अकाली दल की वापसी

क्या हुआ

शिरोमणि अकाली दल ने इंडियन नेशनल कांग्रेस को भारी अंतर से हराकर पंजाब की सत्ता में वापसी की।

उसने 117 सीटों में से 73 सीटें जीतीं।

इससे वह बहुमत के आँकड़े से 14 सीटें आगे रही।

शिअद ने 38.0% वोट पाकर 62.4% सीटें जीतीं।

कांग्रेस 37.9% वोट पाकर 32 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

चुनाव प्रचार

प्रधानमंत्री राजीव गांधी और अकाली दल के अध्यक्ष हरचंद सिंह लोंगोवाल ने 24 जुलाई 1985 को पंजाब समझौते पर दस्तख़त किए। इसमें सिखों की राजनीतिक और नदी-जल से जुड़ी शिकायतों पर बात की गई और अकाली आंदोलन ख़त्म हुआ। अगले ही दिन कट्टरपंथी अकाली नेताओं के एक समूह ने इसे 'धोखा' बताकर ठुकरा दिया, जिससे मतदान से दो महीने पहले पार्टी का कट्टरपंथी धड़ा लोंगोवाल के नेतृत्व से अलग हो गया।12

20 अगस्त 1985 को शेरपुर के गुरुद्वारा अकाल प्रकाश में एक रैली को संबोधित करने के बाद बंदूकधारियों ने लोंगोवाल को गोली मार दी, और उसी शाम उनकी मौत हो गई। इसके बाद समझौते पर दस्तख़त करने वाले अकाली दल गुट की कमान सुरजीत सिंह बरनाला ने संभाली, और वे उस सितंबर के चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बने।34

अमरिंदर सिंह ने 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के विरोध में कांग्रेस और लोक सभा से इस्तीफ़ा दे दिया था। उस अगस्त वे शिरोमणि अकाली दल में शामिल हुए और तलवंडी साबो विधान सभा सीट से उसके उम्मीदवार बने।5

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)
  2. 2 wikipedia.org kbssidhu.substack.com
  3. 3 wikipedia.org kbssidhu.substack.com
  4. 4 theprint.in wikipedia.org
  5. 5 wikipedia.org

क्या बदला

सबसे साफ़ बदलाव पंजाब के दो सबसे बड़े दलों के बीच दिखा।

29 सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) से शिअद के पास गईं; उस साल किन्हीं और दो दलों के बीच इतनी सीटें नहीं बदलीं।

ख़ुद शिअद की सीटें इस बार 37 से बढ़कर 73 हो गईं।

पिछले चुनाव के मुक़ाबले 1.1 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

सबसे क़रीबी मुक़ाबला धर्मकोट, पंजाब में हुआ, जिसका फ़ैसला 277 वोटों से हुआ।

सुजानपुर, पंजाब में इस चुनाव की सबसे बड़ी जीत हुई, जहाँ 56.5% वोट था।

सुल्तानपुर, पंजाब में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 80.8%।

सबसे कम खडूर साहिब, पंजाब में दर्ज हुआ, 43.8%।

पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से लुधियाना ग्रामीण, पंजाब सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 1,45,347 नाम थे।

इस चुनाव का सबसे भरा हुआ बैलट समाना, पंजाब में था, जहाँ 22 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

संसद का पंजाब पुनर्गठन अधिनियम 1 नवंबर 1966 को लागू हुआ, जिससे नया राज्य हरियाणा अलग हुआ, पहाड़ी ज़िले हिमाचल प्रदेश को दिए गए, और चंडीगढ़ साझा राजधानी के रूप में केंद्र शासित प्रदेश बना।6

1967 का विधान सभा चुनाव इस छोटे हुए नक्शे पर हुआ पहला चुनाव था।6

स्रोत
  1. 6 wikipedia.org

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