वापसी का चुनाव
क्या हुआ
एक पार्टी ने मौजूदा सरकार को हराकर भारी जीत के साथ सत्ता में वापसी की।
शिरोमणि अकाली दल ने कुल 117 सीटों में से 75 सीटें जीतीं।
यह जीत उसे 37.6% (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) के साथ मिली।
क्या बदला
इस चुनाव में तस्वीर तेज़ी से पलट गई।
55 सीटें इंडियन नेशनल कांग्रेस से शिअद के पास गईं; उस साल किन्हीं और दो दलों के बीच इतनी सीटें नहीं बदलीं।
बदलाव कितना बड़ा था, यह पार्टी की अपनी सीटों से दिखता है: पिछले चुनाव की 3 सीटों से इस बार 75 सीटें।
इस बार कहीं ज़्यादा पंजीकृत मतदाता वोट डालने आए; उनका हिस्सा पिछले चुनाव के मुक़ाबले 44.8 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला दसूहा, पंजाब में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 53 वोट रहा।
इस चुनाव का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दिड़बा, पंजाब में दर्ज हुआ, 81.0%।
भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर दोनों दलों की कुल सीटें 93 तक पहुँचीं, यानी सदन का 79.5%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से लुधियाना ग्रामीण, पंजाब राज्य का सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 3,04,396 नाम थे।
पृष्ठभूमि
उस साल निर्दलीयों और छोटे दलों को भी कुछ सीटें मिलीं।
अकेले निर्दलीयों को 6 सीटें मिलीं।