कोटकपूराविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1997
मंतर सिंह (निर्दलीय) ने 1997 के विधान सभा चुनाव में 48.6% वोट पाकर कोटकपूरा सीट जीती और मोहिंदर सिंह (SAD) को 15,629 वोटों से हराया।
1977 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में भी सीट नंबर 103 का नाम कोटकपूरा था, तब सीमाएँ पुरानी थीं। 2007 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2012 से सीट नंबर 103 बरनाला है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
सुरक्षित अंतर से जीत — मंतर सिंह 15.0% से जीते।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
4 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | मंतर सिंह निर्दलीय | निर्दलीय | 50,56248.6% |
| 2 | मोहिंदर सिंह BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | BJP-SAD Alliance (Punjab, 1997) | 34,93333.5% |
| 3 | जोगिंदर सिंह | 18,27817.6% | |
| 4 | केवल कृष्ण ABSR | ABSR | 3500.3% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
सुरक्षित अंतर, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
एक निर्दलीय, SAD और INC को 100% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.64 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2012 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2012 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
कोटकपूरा से कौन जीता, 1977–2007
एक निर्दलीय उम्मीदवार ने यह सीट INC से छीन ली, जिसने इसे 1992 में जीता था। मतदान प्रतिशत 1992 के 25.1% से बढ़कर 72.3% हो गया। इसके बाद 2002 के चुनाव में यह सीट SAD ने जीती।