बिना बहुमत वाली विधान सभा
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई, और उसकी जगह लेने वाली पार्टी अकेले सरकार बनाने से थोड़ा पीछे रह गई।
यह (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा थी।
शिरोमणि अकाली दल ने 117 सीटों में से 58 सीटें जीतीं।
पहली बार चुनाव लड़ रही जनता पार्टी 25 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
यह सीटों की नई सीमाओं पर हुआ पहला चुनाव भी था।
कुछ ही समय पहले (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) के ज़रिए सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं।
विधान सभा की सीटें 104 से बढ़कर 117 हो गईं।
शिअद की अपनी सीटें भी 24 से बढ़कर 58 हो गईं।
अहम आँकड़े
उस मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला शुतराणा, पंजाब में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 135 वोटों से हुआ।
इस चुनाव का सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नाभा, पंजाब में दर्ज हुआ, 77.4%।
नए नक्शे पर सबसे ज़्यादा मतदाता नवांशहर, पंजाब में थे, जिसकी मतदाता सूची में 98,294 मतदाता थे।
किसी भी सीट से ज़्यादा उम्मीदवार आनंदपुर साहिब-रोपड़, पंजाब में उतरे, कुल 19।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव राज्य की मौजूदा सीमाएँ बनने के पहले दशक के भीतर भी हुआ।