पंजाब 1951 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 96 सीटें (76.2%)SAD: 13 सीटें (10.3%)IND: 9 सीटें (7.1%)CPI: 4 सीटें (3.2%)ZP: 2 सीटें (1.6%)FBL(MG): 1 सीट (0.8%)LCP: 1 सीट (0.8%)बहुमत के लिए 64126सरकार बनाने के लिए 64
  • INC9676.2%
  • SAD1310.3%
  • निर्दलीय97.1%
  • CPI43.2%
  • ZP21.6%
  • FBL(MG)10.8%
  • LCP10.8%
चुनाव की कहानी

पंजाब में पहली बार मतदान

क्या हुआ

पंजाब के पहले विधान सभा चुनाव में एक पार्टी ने भारी जीत दर्ज की।

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 126 सीटों में से 96 सीटें हासिल कीं।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी शिरोमणि अकाली दल सिर्फ़ 13 सीटें जीत सकी।

फिर भी उसके सिर्फ़ 36.7% था।

क्या बदला

यह पंजाब में हुआ पहला विधान सभा चुनाव था।

पंजाब के कुछ निर्वाचन क्षेत्र बहु-सदस्यीय थे: एक ही मुक़ाबले से एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।

105 निर्वाचन क्षेत्रों में से 21 इसी तरह काम करते थे।

कुल मिलाकर परिणामों से सभी 126 सीटें भरीं, और जीतने वाली पार्टी के पास अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी संख्या से 32 सीटें ज़्यादा थीं।

अहम आँकड़े

उस मतगणना में कुछ सीटों के परिणाम अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला सेराह, पंजाब में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 67 वोट रहा।

प्रतिशत के हिसाब से सबसे बड़ा जीत का अंतर नूरपुर, पंजाब में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 51.7% आगे रहा।

इस चुनाव का सबसे ज़्यादा आदमपुर, पंजाब में दर्ज हुआ, 94.1%।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला गढ़शंकर, पंजाब में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 20 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

यह भारत के नए संविधान के तहत पंजाब का पहला विधान सभा चुनाव था, स्वतंत्र भारत की दलीय राजनीति के बिल्कुल शुरुआती वर्षों में।

राज्य के आँकड़े पूछें

RBI 2024-25

सभी 105 सीटें