छोटे नक्शे पर त्रिशंकु विधान सभा
क्या हुआ
सत्ताधारी पार्टी ने पंजाब में किसी भी दूसरी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, पर इस बार कोई भी पार्टी अकेले सरकार चलाने के लिए ज़रूरी आँकड़ा पार नहीं कर सकी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 104 सीटों में से 48 सीटें हासिल कीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी अकाली दल - संत फतेह सिंह ग्रुप ने 24 सीटें जीतीं।
कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) घटकर 37.5% रह गया।
क्या बदला
हरियाणा और पहाड़ी ज़िलों के अलग होने के बाद यह चुनाव पंजाब के छोटे हुए नक्शे पर हुआ।
छोटे राज्य के हिसाब से विधान सभा की सीटें 154 से घटकर 104 हो गईं।
इस बार कोई भी पार्टी 53 सीटों के बहुमत के आँकड़े को पार नहीं कर सकी, और (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
अहम आँकड़े
उस मतगणना में कुछ सीटों के परिणाम अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला गिद्दड़बाहा, पंजाब में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 57 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, डकाला, पंजाब में विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 73.5% वोट आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) समराला, पंजाब में रहा, 76.4%।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला अबोहर, पंजाब में था, जहाँ एक सीट के लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
पंजाब का नया, छोटा नक्शा देश भर में राज्यों के पुनर्गठन से निकला था।